चिन्मय विद्यालय में हिन्दी काव्य व्याख्यान माला का आयोजन

चिन्मय विद्यालय के सभागार में हिन्दी काव्य व्याख्यान माला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी चिन्मयानंद की पूजा अर्चना के साथ की गई। विद्यालय के संगीत शिक्षक द्वारा स्वागत गान एवं मंगलाचारण गाकर किया।

विशिष्ट अतिथी डाॅ मंजुरानी सिंह (प्रोफेसर एवं निर्देशक, वूमनस विश्व भारती, पश्चिम बंगाल) ने कहा कि हिन्दी के बिना समाज की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। डाॅ मंजुरानी ने बच्चों को कहा कि हिन्दी काव्य समाज व संस्कृति का रीढ़ है। कविता संवेदना के द्वारा समाज को दर्शाती आईना है। जो की दिल से निकलकर दिल को छू जाती है। भाषा, समाज व साहित्य में हिन्दी का सर्वोच्च स्थान है। उन्होंने स्व रचित कई काव्य बच्चों को सुनाई एवं समझाई।

अपनी जड़ों से कट के हरे दिख रहे हैं लोग ।

ये बात सच नहीं है मगर यही सोचते हैं लोग ।

मुख्य अतिथि डाॅ अजय राय ने बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होनें अपने आस-पास प्रकृति प्रदेश वस्तुओं को शब्द देकर उसे लयबद्ध कर काव्य संगीत में प्रस्तुत करने का उपाय बताया। उन्होंने निराला जी द्वारा लिखित सरस्वती वंदना गाकर सभी को प्रभावित कर दिया। साथ ही कबीर जी द्वारा रचित ‘मौका कहा तू ढूढे रे वंदे… । श्यामानंद सरस्वती रौशन द्वारा रचित ‘‘जिदगीं फर्ज का तराना है…। गाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

“हिन्दी काव्य व्याख्यान माला’’ में कक्षा आठवीं एवं नवमी की छात्र-छात्राऐं उपस्थित थे। विद्यालय सचिव महेश त्रिपाठी ने ‘‘हिन्दी काव्य व्याख्यान माला’’ कार्यक्रम की पूरी प्रशंसा की एवं डाॅ अजय रास व डाॅ मंजु रानी सिंह को पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर संगीत शिक्षक शिबेन चक्रवर्ती, जयकिशन राठौर, एवं रुपक झा के साथ विद्यालय के हिन्दी विभाग एवं अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित थे। विद्यालय के प्राभारी प्रचार्य अशोक कुमार झा ने सभी अतिथियों व विद्यालय समिति के सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का संचालन वरिय शिक्षक डाॅ दीपक कुमार ने किया।

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