प्रोजेक्ट बनाते वक़्त आर्थिक व व्यावहारिक पहलू पर ध्यान देना आवश्यक: उपायुक्त मुकेश कुमार

बोकारो। दिल्ली पब्लिक स्कूल, बोकारो में भारतरत्न डाॅ एपीजे अब्दुल कलाम की 88वीं जयंती ‘विश्व छात्र दिवस’ के अवसर पर तीन दिवसीय विज्ञान सम्मेलन ‘सृजन 2019’ का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। नवीन खोजों के प्रति जिज्ञासा बढ़ाने व अधिकार व मुद्दों के प्रति जागरुकता लाने के उद्देश्य से डीपीएस सीनियर इकाई में आयोजित ‘सृजन-2019’ के तहत इंटर हाउस साईंस प्रोजेक्ट्स व चाईल्ड राईट्स प्रोजेक्ट्स प्रतियोगिता में क्रमशः ‘जल संरक्षण’ व ‘मानव तस्करी’ थीम पर प्रोजेक्ट्स के जरिए बच्चों ने अपनी वैज्ञानिक व सामाजिक सोच को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सबका ध्यान आकृष्ट किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि बोकारो के उपायुक्त मुकेश कुमार ने डाॅ कलाम की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद दीप प्रज्ज्वलित कर व फीता काटकर किया। उन्होंने अपने संबोधन में बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक समस्याओं को हल करने की दिशा में एक व्यावहारिक दृष्टिकोण होना चाहिए। समस्याओं के निदान के लिए खोजे गए तरीके ऐसे हों जो आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध हों। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि प्रोजेक्ट बनाते समय आर्थिक व व्यावहारिक पहलू पर विशेष ध्यान दें जिससे जनमानस में इसकी लोकप्रियता बढे। उपायुक्त श्री कुमार ने कहा कि बच्चों ने जिस तरह से वैज्ञानिक व मौलिक रचनात्मक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया है वह प्रशंसनीय है। उन्होंने बच्चों में वैज्ञानिक, मौलिक सोच व सामाजिक सरोकार को बढ़ावा देने के लिए डीपीएस बोकारो द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

भारतरत्न डाॅ एपीजे अब्दुल कलाम की 88वीं जयंती ‘विश्व छात्र दिवस’ के अवसर पर तीन दिवसीय विज्ञान सम्मेलन ‘सृजन 2019’ का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। नवीन खोजों के प्रति जिज्ञासा बढ़ाने व अधिकार व मुद्दों के प्रति जागरुकता लाने के उद्देश्य से डीपीएस सीनियर इकाई में आयोजित ‘सृजन-2019’ के तहत इंटर हाउस साईंस प्रोजेक्ट्स व चाईल्ड राईट्स प्रोजेक्ट्स प्रतियोगिता में क्रमशः ‘जल संरक्षण’ व ‘मानव तस्करी’ थीम पर प्रोजेक्ट्स के जरिए बच्चों ने अपनी वैज्ञानिक व सामाजिक सोच को बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सबका ध्यान आकृष्ट किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उपायुक्त बोकारो श्री मुकेश कुमार ने बच्चों द्वारा प्रदर्शित किये गए प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक समस्याओं को हल करने की दिशा में एक व्यावहारिक दृष्टिकोण होना चाहिए तथा नये-नये अविष्कारों की महत्ता आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएं न केवल वैज्ञानिक और साहित्यिक कौशल को बढ़ाती हैं बल्कि सीखने के नए-नए तरीके भी खोलती हैं।

वहीं प्रतियोगिता के लिए निर्णायक मंडल के रूप में अशोक कुमार (इतिहास विभाग, बोकारो महिला कॉलेज), अशोक कुमार सिंह (अंग्रेजी विभाग, सिटी कॉलेज, बोकारो), डॉ0 संजय सिंह (मनोविज्ञान विभाग, बोकारो महिला कॉलेज), उषा रानी (बोकारो महिला कॉलेज), गुंजिता सिन्हा (जीवविज्ञान विभाग, वीकेएम इंटर कॉलेज, चास), डाॅ0 पूनम बोटनी विभागाध्यक्ष महिला काॅलेज बोकारो, अरविंद कुमार सिंह (शासकीय महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज), ए.के. ओझा (एनजेएस कॉलेज), नसीम अख्तर (एनजेएस कॉलेज), नीलिमा मिश्रा (भौतिकी विभाग, बोकारो महिला कॉलेज) शामिल थे।

निर्णायक मंडल के सदस्यों ने छात्रों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की और जोर देकर कहा कि ऐसी प्रतियोगिताओं से छात्रों के वैज्ञानिक कौशल को विकसित करने में मदद मिलती है, क्योंकि विज्ञान और सामाजिक विज्ञानों का वास्तविक अध्ययन दैनिक व्यवहार में उनके व्यावहारिक निहितार्थ और टिप्पणियों के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है।

प्रधानाचार्य डीपीएस बोकारो श्री ए.एस. गंगवार ने छात्रों द्वारा शिक्षकों के मार्गदर्शन में किए गए प्रयासों की सराहना की और कहा कि हम लगातार उन छात्रों का प्रोत्सहित करने की कोशिश करते हैं, जो कुछ नया सीखने के अनुभवों की खोज के लिए उत्साहित हैं और यह प्रतियोगिता अभी तक उनमें सर्वश्रेष्ठ लाने का एक और प्रयास है।

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