भारत में धूम्रपान करने वाले 12 करोड़ में से 1.21 करोड़ महिलाएं, एक्सपर्ट से जानिए तम्बाकू कितना है खतरनाक

ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे के मुताबिक, दिल्ली में 10.5 प्रतिशत युवा, 16.7 प्रतिशत पुरूष और 2.8 प्रतिशत महिलाएं गुटखे, खैनी और जर्दे का इस्तेमाल करती हैं
विश्व में हर साल 55 लाख लोग तंबाकू के कारण जान गंवाते हैं, सर्वे के अनुसार यह आंकडा 2020 तक 1 करोड़ को पार कर लेगा

हेल्थ डेस्क : विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारत में 12 करोड़ लोग ऐसे हैं जो धूम्रपान करते हैं। इनमें 10 लाख से अधिक ऐसे हैं जो धूम्रपान के कारण अपनी जान गंवा बैठते हैं। 2018 में हुए एक सर्वे के मुताबिक, भारत में महिला स्मोकर्स की संख्या 1.21 करोड़ है। विशेषज्ञों के मुताबिक, महिलाओं में स्मोकिंग के बढ़ते मामलों का असर उनकी प्रजनन क्षमता पर पड़ रहा है। वहीं ऐसी महिलाओं की तादात भी कम नहीं है जो पैसिव स्मोकिंग से जूझ रही हैं यानी उनके आसपास कोई न कोई धूम्रपान कर रहा है और असर उन पर भी पड़ रहा है। हर साल लोगों को तंबाकू के खतरे बताने और जागरूक करने लिए 31 मई को वर्ल्ड नो टोबैको डे मनाया है। भास्कर ने एक्सपर्ट से जाना महिलाओं पर इसका क्या असर होता है।

तम्बाकू इतना है खतरनाक
महिला-पुरुष दोनों की प्रजनन क्षमता घटाती है स्मोकिंग

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुभा सिंह के मुतबिक, महिलाओं में पैसिव स्मोकिंग गर्भधारण में देरी की वजह भी बन सकता है। यह न केवल अंडाशय को प्रभावित करती है बल्कि प्रजनन क्षमता में भी कमी लाती है। धुएं में मौजूद जहरीले रसायन शरीर में पहुंचते हैं और फेफड़ों के साथ दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. शोभा गुप्ता का कहना है, धूम्रपान पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या को कम और सुस्त भी कर सकता है। अधिक धूम्रपान करने वाले पुरुष में स्वस्थ शुक्राणु घटते हैं। इसके अलावा धूम्रपान करने वाली महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब में समस्या पैदा हो सकती है।
शरीर के कई हिस्सों में कैंसर की वजह
कैंसर के मामले बढ़ने का एक बड़ा कारण तंबाकू भी है। यह होंठ, आहार नली, फेफड़े और मुंह के कैंसर की वजह भी बनता है। वहीं महिलाओं में गर्भाशय का कैंसर की वजह भी बन सकता है। विशेषज्ञ के मुताबिक, तंबाकू या स्मोकिंग छोड़ने के 12 घंटे में शरीर में सकारात्मक बदलाव शुरू हो जाते हैं। शरीर में कार्बन मोनो ऑक्साइड का स्तर घटता है। रक्त का प्रवाह और फेफड़ों की क्षमता बढ़ने लगती है।

हुक्का भी कम खतरनाक नहीं
भारत में इन दिनों हुक्का का चलन है। ज्यादातर लोगों को लगता है यह तम्बाकू की तुलना में नुकसानदेह नहीं है जबकि ऐसा नहीं है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता गोस्वामी कहती हैं, हुक्के में प्रयोग होने वाले तम्बाकू सिगरेट की तुलना में लोगों को और भी अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। यह उतना ही बुरा है जितना आप किसी भी रूप में तंबाकू चबाते हैं या धूम्रपान करते हैं।
सांस लेने में दिक्कत और कम होती याद्दाश्त
जनरल फिजिशियन डॉ. अजीत आनंद के मुताबिक, धूम्रपान में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड खून में प्रवेश करता है और आपकी ऑक्सीजन-क्षमता को सीमित करता है। यह कफ को बढ़ाता है जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। धूम्रपान करने वालों में डिमेंशिया या अल्जाइमर जैसे रोग होने का खतरा अधिक होता है।

समय से पहले झुर्रियों की वजह स्मोकिंग
तंबाकू फेफड़े के लिए जितना खतरनाक है उतना कैंसर का खतरा भी बढ़ाता है। इसका असर स्किन पर समय से पहले झुर्रियों के रूप में देखा जा सकता है।
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. निवेदिता दादू कहती हैं, गालों-होठों पर गहरी रेखाएं, आंख के कोनों में झुर्रियां भी धूम्रपान के परिणाम हैं। यह दो तरह से प्रभावित करता है, पहला धुएं में मौजूद रसायन स्किन पर इकट्ठा होकर इसे सुखाते हैं और दूसरा यह रक्त वाहिनियों को प्रभावित करता है। इससे ऑक्सीजन कम मिलती है जो त्वचा रोगों के रूप में दिखाई देता है।
विशेषज्ञों ने बताए कैसे छोड़ें तंबाकू
तंबाकू और इससे जुड़े उत्पादों को धीरे-धीरे छोड़ने की कोशिश करें।
तलब लगने पर मुंह में सौंफ, मिश्री, लौंग या इलायची रखें।
रोजाना 30 मिनट का मेडिटेशन करें और अपना ध्यान म्यूजिक या स्पोर्ट्स जैसी दूसरी एक्टिविटी की ओर डायवर्ट करें।
तनाव से दूर रहें क्योंकि यह बार-बार इस ओर ले जाने की कोशिश करता है।
व्यायाम को लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं।
अधिक गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की मदद लें।

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