दिखाई हिम्मत तो बालिका वधू बनने से बची नाबालिग, पुलिस ने भी दिया साथ, जानिए कैसे

पटना : फुलवारीशरीफ थानाक्षेत्र के गोनपुरा पंचायत की बेटी ने सोमवार को मिसाल पेश की और खुद को बाल विवाह की भेंट चढ़ने से बचा लिया। किशोरी ने मौका पाकर सहेली के मोबाइल से पुलिस को कॉल कर अपनी शादी रुकवाने की गुहार लगाई।

सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष मोहम्मद कैसर आलम ने महिला पुलिस अफसर पूनम कुमारी को दलबल के साथ किशोरी के घर भेजा और मैट्रिक के सर्टिफिकेट की जांच की। इसमें लड़की की उम्र 17 साल छह महीना पाई गई। इस समय आरा से बरात निकलने ही वाली थी। पुलिस ने तुरंत दूल्हे को कॉल कर बरात लाने से मना कर दिया।

लड़की के पिता को थाने पर लाया गया। थानाध्यक्ष ने बताया कि मुखिया आभा देवी को बुलाकर लड़की के घरवालों से बॉन्ड भराया गया। कहा गया कि जब तक लड़की 18 साल की नहीं हो जाती, तब तक हर महीने थाने में आकर परिजनों को सूचना देनी होगी।

थानाध्यक्ष ने दी बाल-विवाह से जुड़े कानून की जानकारी

हिरासत में लिए जाने के बाद लड़की के पिता ने कहा कि उनकी बेटी की उम्र अधिक है। स्कूल में दाखिला लेने के दौरान उसकी उम्र कम लिखी गई थी। ग्रामीण भी लड़की के पिता के पक्ष में खड़े थे। थानाध्यक्ष ने उन्हें बाल-विवाह से जुड़े कानून की जानकारी दी। तब जाकर वे शांत हुए।

परिजनों से बागी किशोरी डरी-सहमी थी, लेकिन पुलिस ने उसके साहस की तारीफ की और उसका हौसला बढ़ाया। साथ ही, उसके सुरक्षा की भी जवाबदेही ली। लड़की ने परिजनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया।

खेत बेचकर शादी कर रहे थे पिता

किशोरी की शादी आरा निवासी 22 साल के युवक से तय की गई थी। किशोरी के पिता किसान हैं। उनका कहना है कि उन्होंने खेत बेचकर बेटी की शादी की तैयारियां की थी। समाज में उनकी किरकिरी हो गई। इस पर पुलिस ने कहा कि बालिग होने तक लड़की की मर्जी के बगैर उसकी शादी किसी के साथ नहीं की जा सकती। अगर वह उस लड़के को अपनाना चाहेगी, तभी उससे शादी होगी।

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